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udaan

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Udan Poetry

उड़ान

बंद है मन की खिड़कियाँ
ज़रा हवा के झोंके उधार दो
मुझे बारिशों को जीतना है
मेरे पंखों को इक उड़ान दो

मेरे गाँव की गलियाँ बदल जायेगी शहर की सड़कों में
छोटे छोटे डिब्बे जो बदल जायेंगे मीनारों में

इक बाग सजाना है उमीदों का
मुझे कुछ बीज उधार दो

अमावस है , काली घनी रात
पूर्णिमा बहुत दूर खड़ी
पर हाथों में लेकर दिया
मैं भी पथ पर चल पड़ी

खोजने जीत को
सुकूँ को, प्रीत को

बादलों के उपर से देखना है जहाँ मुझे
समन्दर की गहरायीओं से भी नीचे जाना है मुझे
मन में निश्चय है
मंज़िल बस विजय है

बस कुछ वक़्त उधार दो
मुझे मेरी उड़ान दो,

#lotus
#feature

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