poem Archives - ThePeepTimes

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Mehngai – Poem by Parveen

किसे पता था ये दुनिया यूंही बदल जायेगी जो कल तक एक रूपये का मोल था आज दस भी ना चुका पाएगी ये महंगाई...

Fool pukaro mujhe

फूल पुकारो मुझे, मैं रंगों से सजी! गुलाब पुकारो मुझे, मैं काटों में पली! कमल पुकारो मुझे, मैं कीचड़ में ढली! चन्द्रकान्ति पुकारो मुझे,...

Purani yaadein by Parveen

उम्र के किसी उस राह पर मिलेंगे कभी हम, कुछ जानी पहचानी सी खुश्बु झिलमिल सी यादों के साथ, देखेंगे एक दूसरे को लेकिन...

Aurat Aur Samaj – Poem by Ajnabi

हमारे समाज में औरत, बहू, बेटी, बच्ची, लड़की, आप जो चाहे इन्हें नाम दें ये बड़ी मज़लूम और लावारिस मख़लूक है हमारे समाज में...

Ek Ladki Marne Par Majbur Hui by Parveen

एक लड़की मरने पर मजबूर हुई जब ये दुनिया जाहिलों की बस्ती में सूर हुई फिर वो किसी हैवानियत में मख़मूर हुई किया उसने...

Preet lagi — A poetry by #Lotus

प्रीत लगी प्रीत लगी जग की रीत लगी मेरे तन को प्रेम की प्रीत लगी बहारो बहार खाली लगे बाज़ार चाँद अब सूरज हसीं...